Wednesday, November 26, 2008

हमारी राष्ट्र भाषा

विश्व के २०० से भी अधिक देशों में से लगभग १०-१५ देश ही ऐसे हैं जिन्हों ने अंग्रेज़ी को सरकारी भाषा के रूप में मान्यता दे रखी हैं । अधिकतर देश अपनी अपनी भाषा में ही काम करने में रुचि रखते हैं.भारत का यह दुर्भाग्य है की देश में राष्ट्र भाषा हिन्दी का विरोध देखने को मिलता है.
देश की सरकार में बैठे नेताओं व चंद स्वार्थी लोगों ने सदा ही हिन्दी को उसका स्थान दिलाने से रोका है. तथा हमारे देश की राजनीति सदा से ही स्वार्थी नेताओं से परिपूर्ण रही है, जिन्होंने अपने स्वार्थ के चलते सिर्फ़ स्वहित का ही सोचा और देश हित के कार्य कभी किए ही नहीं.
हिन्दी को सच्चे रूप में राष्ट्र भाषा का स्थान न मिल पाना ही शायद आजकल देखी जाने वाली सांप्रदायिक दंगों की वजह है.यह हमारे लिए शर्म की बात है की हमारे देश के कई प्रान्तों में रहने वाले लोगों को हिन्दी समझ में ही नहीं आती, बोलना तो दूर की बात है.
देश भर के कई उच्च क्षेत्रीय कार्यालयों , अनुष्ठानों और महाविद्यालयों में हिन्दी में बोलना शर्म की बात मानी जाती है. देश में कुछ उच्च पद पर आसीन लोग और कई जानी मानी हस्तियाँ भी हिन्दी नहीं बोल पाती हैं.
राष्ट्र भाषा हर देश की उन्नति का साधन है और इसका प्रभाव हमारी सभ्यता और संस्कृति पर भी देखने को मिलता है. तथ्य ये नहीं है की हम हिन्दी ही जाने, हमें अंग्रेज़ी और अन्य देशों की भाषाओँ का ज्ञान होना अच्छी बात होगी, परन्तु विदेशी भाषा के साथ साथ आने वाले विचार एवं , हमारी मूल सभ्यता के लिए खतरा बनते जा रहे हैं.
अंग्रेज़ी आज हर विद्यार्थी के लिए अत्यन्त आवश्यक है, ये में जानता हूँ. हर क्षेत्र में आगे स्वविकास और सफलता प्राप्ति के लिए अंग्रेज़ी का पूर्ण ज्ञान अनिवार्य है, परन्तु हिन्दी को भूल जाना भी तो ठीक नहीं.
अंग्रेज़ी अगर हर विद्यार्थी के लिए आगे बढ़ने का मध्यम है तो हिन्दी उसकी पुरातन संस्कृति की झलक है. अंग्रेज़ी अगर हमें अन्तराष्ट्रीय स्टार पर जोड़ती है तो हिन्दी हमें हमारे देश को विश्व में संबोधित करने का गौरव देती है.
पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा हिन्दी में संयुक्त राष्ट्र में संबोधन को समस्त संसार ने सराहा था. हम अगर स्वयं अपनी राष्ट्र भाषा का सम्मान करेंगे तो सारा संसार हमारा सम्मान करेगा.
हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है और उसे उसका सही स्थान मिलना चाहिए. इसी कोशिश में मैं आप सभी का साथ चाहता हूँ. कृपया मुझे अपना सहयोग दें.




-सपन


एसीएम २२